Spiritual : पुरूषार्थ से परमार्थ तक

जब कृपा राम जी की होती है तब संत अनुकूल मिलते है। राम और रामायण को जीवन में धारण करेंगे तो ही पुरूषार्थ यानि धर्म के मार्ग पर चल पाएंगे। रामायण के अरण्यकाण्ड में एक बार श्री लक्ष्मण जी ने प्रभु श्रीराम जी से पूछा कि हे प्रभो! ज्ञान, वैराग्य और माया का वर्णन कीजिए और…

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मंजिल तो तू ही है

मंजिल तो तू ही है

अक्सर चर्चा के दौरान हम अलग-अलग धर्मो की बात करते हैं लेकिन परमात्मा को एक बताते हैं किंतु ये नहीं बता पाते कि आखिर परमात्मा है कौन? जिन्होंने ये जान लिया वो तो भगवान के हो गए, जिन्होंने इसे जाना, क्या उनके जान लेने से हम जान पाए? असंभव, ये हो ही नहीं सकता क्योंकि…

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मतकर बात निराशा की

मतकर बात निराशा की

बूंद डरती है, सागर में जाएगी तो खो जाएगी। यह डर सच तो है परंतु झूठ से ज्यादा कुछ और नहीं है। खोने में कुछ भी हानि नहीं है, क्योंकि खोकर बूंद सागर हो जाएगी। छोटा मिटेगा, बड़ा उपलब्ध होगा जैसे बीज मिटता है तो ही वृक्ष बनता है। मौजूदा परिदृश्य पर गौर करेंगे तो…

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